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शनिवार, 24 मई 2014

इच्छाओं का प्रतिबिम्ब


दिन प्रतीक्षा में कटा
रात करवटों में बीती
न कोई सन्देश आया
न ही वो आयी
रात भर संशय की
स्थिति बनी रही
हृदय से 
शुभ कामनाओं की
प्रार्थना निकलती रही
सुबह स्थिति सामान्य हुई
हर दिन यही बात थी
न किसी को आना था
न किसी की प्रतीक्षा थी
सारी बातें भावुक
मन की उपज थी
दबी इच्छाओं का
प्रतिबिम्ब थी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
सपना,ख्वाब,इच्छा,प्रतिबिम्ब

273-40--24--05-2014

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