ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

बुधवार, 28 मई 2014

पहली बारिश


ख़त में
वादा किया था
पहली बारिश में मुझसे
पहली मुलाक़ात करेगी
पहली बारिश भी आयी
मैं इंतज़ार करता रहा
वो बेफिक्र सोती रही
ख़्वाबों की दुनिया में
खोती रही
जब तक उसकी नींद उडी
बारिश थम चुकी थी
चटक धूप खिल चुकी थी
मेरी मिलने की ख्वाहिश
कम हो चुकी थी
आँखें भी थक चुकी थी
नींद की गोद में जाने की
जिद करने लगी थी
उसकी ख्वाहिश
जाग चुकी थी
जब तक वो आयी
मैं जा चुका था
हर बार यूँ ही होता था
हमारी ख्वाहिशों का
वक़्त जुदा होता था
ना मुलाक़ात होती थी
ना हसरतें परवान 
चढ़ती थी
पहली बारिश ही
आख़िरी 
बारिश होती थी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
बारिश,मोहब्बत,प्रेम,ख्वाहिश

289-56--28--05-2014

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें