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रविवार, 18 मई 2014

वो खुशियाँ कहाँ से लाऊँ


वो खुशियाँ
कहाँ से लाऊँ
जिनमें दर्द न छुपा  हो
वो हँसी कहाँ से लाऊँ
जिसमें दर्द का
अहसास न हो
वो दिल कहाँ से लाऊँ
जो कभी जज़्बातों में
झुलसा न हो
वो मन कहाँ से लाऊँ
जिसमें कभी कोई
तूफ़ान  उठा हो
वो चेहरा कहाँ से लाऊँ
जिसमें सिर्फ सुकून
दिखता हो
वो ज़िंदगी कहाँ से लाऊँ
जिसमें कोई गम न हो
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
261-28--18--05-2014

ज़िंदगी,शायरी,हँसी,ख़ुशी,गम,दर्द,सुकून  

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