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गुरुवार, 22 मई 2014

सुबह से शाम हो गयी वो चिड़िया नहीं आयी


सुबह से शाम हो गयी
वो चिड़िया नहीं आयी
अकेलेपन को
मधुर आवाज़ से
भरनेवाली वो चिड़िया
आज क्यों नहीं आयी
मन में उठते
प्रश्नों के ज्वार भाटे को
विराम नहीं
हृदय में संशय की
आंधी को ठहराव नहीं
क्या चिड़िया भी
सांसारिक हो गयी
मुझे छोड़ किसी
दूसरे घर में बस गयी
मन की उथल पुथल
रात भर चलती रही
सुबह घर की घंटी बज़ी
आधी नींद से आँख खुली
दरवाज़ा खोला
सामने दूधवाला खड़ा था
मुझे देखते ही बोला
लगता है
आपकी चहेती चिड़िया
बिल्ली का शिकार हो गयी
दृष्टि घुमाई
दरवाज़े के बगल में
अधखायी चिड़िया
निर्जीव पडी थी
मरते मरते सन्देश दे गयी
जान दे सकती है पर
विश्वासघात
नहीं कर सकती 

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
विश्वासघात 

271-38--22--05-2014

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