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गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

संतुष्टि

संतुष्टि
मेरे हाथ में रंग आये
मैंने तस्वीर बनाने का
प्रयास किया
पर सुन्दर तस्वीर
नहीं बना पाया
तुम्हारे हाथ में रंग आये
तुमने सुन्दर तस्वीर
बनायी
 उसके हाथ में रंग आये
उसने रंगों को डब्बों में
बंद रहने दिया
मैं सृजन करना चाहता था
पर पूर्ण सफलता
प्राप्त नहीं कर पाया
प्रयास करने की संतुष्टि
मन को अवश्य दे पाया 
तुमने सृजन किया
तुम सफल रहे
कुछ सार्थक करने की
संतुष्टि मन को दे पाये 
वो सृजन करना ही नहीं
चाहता था
जीवन भर असफल रहा
भाग्य को दोष देता रहा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
जीवन,जीवन मन्त्र,सृजन,कर्म,संतुष्टि,भाग्य

225-68--25--04-2014

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