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शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

राजनीति गज़ब की चीज़ होती है


राजनीति
गज़ब की चीज़ होती है
आम आदमी की
चल निकलती है
पीढ़ियों तक की
बन पड़ती है
कब ख़ास बन जाता है
खबर तक नहीं होती
लोगों के दिलों में
आग लगती है
धुंआ भी उठता है
चीखें भी निकलती हैं
मगर कुर्सी पर
बैठने के बाद
नेताओं की जुबां
दिन रात फिसलती है
मगर आँखों में
जलन नहीं होती
ना जाने उनकी आँखें
बंद कैसे रहती हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
169-11--04--04-2014


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