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बुधवार, 16 अप्रैल 2014

ज़िंदगी की खटर पटर


रेलगाडी की
किसी भी क्लास में बैठो
पटरियों की खटर पटर
कानों में आती 
रहती है
रेलगाडी की तरह  
ज़िन्दगी में भी 
खटर पटर चलती रहती धनाढ्य हो या गरीब
ऊंचे ओहदे पर बैठा हो
साहब के कमरे के बाहर
बैठा चपरासी हो
कुछ ना कुछ खटर पटर
चलती रहती
खटर पटर से खुद को
अभ्यस्त कर लो
सहने की आदत डालो
ज़िन्दगी के सफ़र में
मंजिल की तरफ बढ़ने में
आसानी होती
ऐसा नहीं करो तो
मन को परेशान होती
 इच्छा 
अनुरूप 
मंजिल नहीं मिलती
मन की पीड़ा निरंतर
बनी रहती 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

जीवन ,जीवन सफर ,जीवन मन्त्र
201-44--16--04-2014

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