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रविवार, 27 अप्रैल 2014

कौन लिख सकता है उस औरत की कहानी

कौन लिख सकता है
उस औरत की कहानी
गरीबी जिस के लिए
 अभिशाप बन गयी
जिसे जीते जी
कोई इंसान ना मिला
जिसने ना बचपन देखा
ना जवानी देखी
बुढापे में भी नोची गयी
निरंतर दुत्कारी गयी
हवस का
शिकार होती रही
पेट के
खातिर सहती रही
ज़िंदगी भर खुदा से
बदकिस्मती का
कारण पूछती रही
निरंतर
दुआ करती रही
आसूं बहाती रही
बेबस जीती रही
अंत में मर गयी
किसी पुरुष की
कलम में
इतना  हूनर नहीं
इतनी ताकत नहीं
जो एक मज़बूर
औरत के दुखों को
कागज़  पर उतार  सके
संसार को उसकी
सच्चाई बता सके

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
नारी, औरत, मजबूर,स्त्री, हवस, गरीबी

231-74--27--04-2014

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