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बुधवार, 2 अप्रैल 2014

मोहब्बत को शतरंज का खेल मत समझो


मोहब्बत को
शतरंज का खेल
मत समझो
मुझे प्यादा खुद को
राजा ना समझो
तुम्हारे पास तो
ख़ूबसूरती का वज़ीर है 
चाहनेवालों के
हाथी घोड़े ऊँट भी हैं
कभी तिरछी चाल
चलते हो
कभी पीछे से वार
करते हो
कभी ढाई घर चल कर
मुझे भरमाते हो
जुदाई के वजीर से
शह देते हो
मात का डर दिखाते हो
मात ही देनी है
तो सामने से वार करो
कह दो मुझसे
मोहब्बत नहीं करते
इस तरह
तडपा तड़पा कर
ना मारो
मोहब्बत को
शतरंज का खेल
ना समझो
हर दिन नयी चाल
मत चला करो
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
162-04--02--04-2014

मोहब्बत,प्रेम,प्यार,शतरंज ,जुदाई

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