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सोमवार, 7 अप्रैल 2014

कवी की कलम


कवी की कलम
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हँसी खुशी
पीड़ा,वेदना
सोच,विचार
हास्य व्यंग्य
अनुभव ,प्यार
भावनाएं
सम्भावनाएं
जीवन का हर रंग
अनंत शब्दों में
ढल कर
भिन्न रूपों में
कविता
नदी से बहती हैं
जिसने समझा उसे
सार्थक लगती है
मन को लुभाती हैं
अपने साथ बहाती है
जिसने नहीं समझा
उसे निरर्थक
परिश्रम लगती
जीवन की गति
अनुरूप
कवी की कलम
कभी नहीं थमती
कविता
अविरल बहती 
कविता उसकी  
नियति है

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
177-19--07--04-2014
कवी ,कविता, कलम


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