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रविवार, 13 अप्रैल 2014

स्वयं को समझदार तो नहीं मानता


स्वयं को समझदार 
तो नहीं मानता
पर जीवन की 
जटिलताओं से
समस्याओं से
मनुष्य की भावनाओं से
कुंठाओं से इच्छाओं से
अहम् और निश्छल मन से
मेरा गूढ़ परिचय है
स्वयं अपनी कठिनाइयां
पूर्णतया दूर करने में तो
सक्षम नहीं हूँ
पर अपने अनुभव से
उन्हें सुलझाने में दूसरों की
सहायता अवश्य कर 
सकता हूँ
मुझसे समझदार उन्हें
मुझसे अधिक आसानी से
सुलझा पायेंगे
मुझसे कम समझदार
उन्हें सुलझाने की दिशा में
एक कदम आगे बढ़ जायेंगे
बस यही कामना कर
अपने अनुभव और समझ को
कलम के माध्यम से
कागज़ पर उकेरता हूँ
एक का भी
भला हो जाएगा तो
उसे भी अपनी ही
सफलता मान कर
संतुष्टि के लक्ष्य को
पाने के पथ पर
में भी एक कदम आगे
बढ़ जाऊंगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
जीवन जीवन मन्त्र,भावनाएं ,समस्याएं ,समझ ,सोच , कुंठाओं

192-34--13--04-2014

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