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रविवार, 30 मार्च 2014

श्रेष्ठता की कसौटी


तुम दूसरों के लिए
श्रेष्ठ हो सकते हो
अधिकतर बातों में
मुझसे बेहतर हो 
सकते हो 
फिर भी मैं
तुम्हारी हर बात की
प्रशंसा नहीं कर सकता
हीन भावना से
ग्रस्त हो कर
ऐसा नहीं करता हूँ
मेरा विवेक
ऐसा करने की
अनुमति नहीं देता है
तुम्हारी कुछ बातों से
मतैक्य नहीं रखता
असहमती के कारण
तुम मुझे हीन भावना से
ग्रस्त कहते हो
सच तो यह है तुम स्व्यं
हीन भावना से ग्रस्त हो
वास्तव में श्रेष्ठ होते तो
मेरी सोच को सम्मान देते
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
150-43-30--3-2014  

असहमती,हीन भावना,मतैक्य,जीवन,विवेक,जीवन मन्त्र   

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