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शुक्रवार, 28 मार्च 2014

पहला कदम खुद को ही बढ़ाना पड़ता है


महीनों तक कई 
मित्र ना मुझे फ़ोन करते हैं
ना ही किसी और तरीके से
संपर्क करते हैं
उनके व्यवहार से
परेशान नहीं होता हूँ
सोचता हूँ
व्यस्त होंगे
अपनी परेशानियों को
सुलझाने में लगे होंगे
पर मुझे याद
अवश्य करते होंगे
खुद फ़ोन उठाता हूँ
उनसे बात करता हूँ
मेरे लायक
कोई कार्य हो तो पूछता हूँ
दिनों तक
बात नहीं करने के लिए
क्षमा माँगता हूँ
पर संपर्क नहीं करने के लिए
उनसे शिकायत नहीं करता
सोचता हूँ
रिश्तों को बनाये रखने के लिए
अहम् को
त्यागना आवश्यक होता है
पहला कदम
खुद को ही बढ़ाना पड़ता है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
145-38-28--3-2014

रिश्ते,पहल,अहम्,जीवन,जीवन मन्त्र

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