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बुधवार, 12 मार्च 2014

वो बेचैन ,मैं सुकून से कैसे रहूँ ?


वो खुश नहीं
मैं खुश 
कैसे खुश रहूँ ?
वो रोये 
मैं हँसू 
ये मुमकिन नहीं
दिल की डोर से 
बंधी हैं
वो डूबे मैं तैरूं,
संभव नहीं
वो ज़िंदगी से 
लड़ रही
मैं जीत के गीत
कैसे गाऊँ ?
जान से ज्यादा 
चाहता हूँ
वो बेचैन
मैं सुकून से 
कैसे रहूँ ?
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
10-08-2011
1328-50-08-11

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