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मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

अब कलम की स्याही बदलना चाहता हूँ


अब कलम की स्याही
बदलना चाहता हूँ
विविधता के रंगों से
भरना चाहता हूँ
हर्षोल्लास के शब्दों से
सजाना चाहता हूँ
फूलों की कोमलता
का आभास
पगडंडियों जैसे
जीवन की
जटिलताओं की
अनुभूती
कराना चाहता हूँ
जीवन का हर पह्लू
द्रष्टिगत हो जाए
पढ़ने वाले अपने
जीवन से जोड़ सके
कुछ सीख सके ,
कुछ समझ सके
विपत्तियों से लड़ सकें
ऐसा कुछ लिखना
चाहता हूँ
अब कलम की स्याही
बदलना चाहता हूँ
अनुभव जगत में
बांटना चाहता हूँ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
99-44-25-2-2014
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

जीवन,अनुभव,लिखना ,बांटना

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