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शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

पक्षी पर कविता -मैं पंछी जगत का

(पक्षी पर कविता )
मैं पंछी जगत का
मैं पंछी जगत का
यह धरती गगन
यह संसार मेरा
ना सीमाओं का बंधन
ना किसी का पहरा
वृक्षों पर नीड़ बनाऊं
ताल तलैय्या में
प्यास बुझाऊँ
दाने चुग्गे से
भूख मिटाऊँ  
पंख फैलाऊं
उन्मुक्त उड़ूँ
पर्वत सागर पर
विजय पाऊँ
जहां जमाऊँ डेरा
वहीं बसेरा मेरा
ना कोई देश
ना विदेश मेरा
मैं पंछी जगत का
यह धरती गगन
यह संसार मेरा

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
107-52-27-2-2014
पंछी,पक्षी,गगन,धरती,नीड़,प्रकृति
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर



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