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मंगलवार, 11 फ़रवरी 2014

हर मौसम में खिलता हूँ


चमेली जैसे
महकता नहीं हूँ
गुलाब
जैसा सुन्दर नहीं हूँ
गुल दाउदी
जैसे लुभाता नहीं हूँ
आर्किड जैसे
हँसता नहीं हूँ
ढेलिया जैसे
सजता संवरता नहीं हूँ
पर बहुत प्रसन्न हूँ
सदा बहार के फूल
जैसा हूँ
हर मौसम में खिलता हूँ
सीधा सरल दिखता हूँ
श्रृंगार बिना जीता हूँ
निरंतर मुस्काराता हूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
72-17-11-2-2014
चमेली,गुल दाउदी.गुलाब.डेहलिया,
आर्किड ,सदाबहार, जीवन,जीवन मन्त्र,

निरंतर

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