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सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

मैंने सच के पैर नहीं देखे


मैंने सच के 
पैर नहीं देखे
ना ही झूठ का 

धड़ देखा है
परिणाम 

अवश्य देखा है
उसी से 

अंदाज़ लगाता हूँ
सच ताकतवर तो होगा
मगर जुबान का
कड़वा होता होगा
देखने में सुन्दर नहीं
पर उसका मन
सुन्दर होता होगा
झूठ चेहरे से सुन्दर
शरीर से सुडोल
मन से 

विकृत होता होगा
सोचता हूँ
फिर भी क्यों लोग
झूठ से 

प्रभावित होते हैं
सच से 

मुंह छुपाते हैं 


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
69-14-10-2-2014
सच ,झूठ,जीवन,

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

2 टिप्‍पणियां:

  1. बाहरी सुंदरता सबको अच्छी लगती है .... जो मन मोह लेती है ... और सत्य तो भीतर से सुन्दर है उसकी बाहर सिर्फ कड़वाहट है इसलिए लोग झूठ पसंद करते हैं ... बहुत सार्थक रचना !!

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  2. क्या सच में सच ताकतवर होता है ?

    उत्तर देंहटाएं