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शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

ज़िंदगी रोते रोते नहीं हँसते हँसते जीनी चाहिए


सादगी
रहन सहन में नहीं
व्यवहार में होनी चाहिए
नैतिकता बातों में नहीं
चरित्र में होनी चाहिए
सुंदरता चेहरे में नहीं
मन में होनी चाहिए
प्रेम शारीरिक नहीं
ह्रदय में बसना चाहिए
ज़िंदगी रोते रोते नहीं
हँसते हँसते जीनी चाहिए
जीवन में बाधाओं को
धैर्य से पार करना चाहिए
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
56-01-012-2014
सादगी,व्यहार,जीवन,जीवन मन्त्र ,धैर्य,चरित्र

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