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मंगलवार, 28 जनवरी 2014

प्रेम के दो शब्द


प्रेम के दो शब्द
मनोवेदना को
कम करते हैं
सहानुभूति के
दो शब्द
हिम्मत देते हैं
प्रशंसा के दो शब्द
बेहतर करने को
प्रेरित करते हैं
निंदा के दो शब्द
मन को
व्यथित करते हैं
लांछन के दो शब्द
स्व्यं पर
विश्वास घटाते हैं
पीठ पीछे कहे
दो मिथ्या शब्द
सम्बन्धों को
ध्वस्त करते हैं
कवी के
दो सार्थक शब्द
मन को लुभाते हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
47-47-28-01-2014
शब्द,जीवन,प्रेम,व्यक्त करना 

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