ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

सोमवार, 13 जनवरी 2014

पथ भ्रष्ट


लोग रास्ते से
भटके हैं
बहस में अटके हैं
यथार्थ से दूर
स्व्यं को श्रेष्ठ 
सिद्ध करने में
उलझे हैं
अहम् की तुष्टिं
में फंसे हैं
17-17-13-01-2014
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

अहम्.तुष्टि,पथ भ्रष्ट ,बहस,श्रेष्ठ ,जीवन

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें