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शनिवार, 21 दिसंबर 2013

Why should I regret

My darkest hour
Was brighter 
Than of many 
I know 
My prayers 
Were answered
More 
As compared
 To many
My ambitions  
Were fulfilled 
More than 
I had wished 
Then why should 
I regret 
Cry more than many 
Who have suffered 
More than me  
33-403-21-12-2013 
Life.difficulties,prayer,regret 
Dr.Rajendra Tela,Nirantar.

Talking to myself


I could never find
Anybody better than
Myself
To listen to my woes
Whenever I tried to
Share my problems
With somebody
Nobody
Had the patience
To listen to them
I got an advice
Even before
I could finish
Narrating my woes
I was the only one
Who listened with
Patience
Resolved my woes
32-402-21-12-2013
Introspection,patience,life,

Dr.Rajendra Tela,Nirantar

एक दरवाज़ा ऐसा भी हो

घर में
एक दरवाज़ा
 ऐसा भी हो
जब भी
मन व्यथित हो
चुपचाप घर से
निकल जाऊं
एक ऐसे उपवन में
पहुँच जाऊं
जहां ना कोई जाने
ना पहचाने
नर्म घास में बैठ कर
जी भर के
वृक्षों से बतियाऊं
बातों बातों में
उनसे पूछ लूँ
कैसे सहते हैं
आंधी तूफ़ान
कैसे करते हैं
बर्फीली सर्दी
झुलसाती
गर्मी का सामना
कौन सा
पंछी डाल के ऊपर
कौन मनुष्य
छाया में नीचे बैठा है
चिंता किये बिना
खुशी से जीते हैं
हर मौसम में
हवाओं के साथ
झूमते हैं 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
31-401-21-12-2013
चिंता,व्यथा,एकांत जीवन,जीवन मन्त्र

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2013

नभ की साज सज्जा


नभ की 
साज सज्जा
चाँद तारों से होती

रंग बिरंगे
विचरण करते  
पक्षियों से 
रूप निखरता
चाँद तारे 
पक्षी नहीं होते
नभ में वीराना होता
हर ओर मौत का
सन्नाटा पसरा होता
बिना वृक्ष,जल,पहाड़
पृथ्वी का भी
ऐसा ही हाल होता

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
30-400-19-12-2013
प्रकृति,नभ,आकाश,तारे,चाँद

,नभ,जीवन,

गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

समय के साथ


समय के साथ
बड़े वृक्ष भी
धराशायी होते हैं
नए वृक्षों के लिए
स्थान खाली करते हैं
फिर क्यों लोग
पद छोड़ना नहीं चाहते 
नयों को
आगे बढ़ने नहीं देते
जीवन के
शाश्वत नियम को
निभाना नहीं चाहते
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

29-399-19-12-2013
जीवन,म्रत्यु,

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

My restless eyes


My restless eyes
Never say bye
May be morning
May be night
Always searching
For something
That attracts
The inquisitive mind
Sometimes at the
Wonders of nature
Sometimes
At the high skies
When my heart is 
In pain
In support they cry
When the heart 
Is happy
They glitter like gold
Their inquisitiveness
Never ends
Whether open
Or closed
My restless eyes
Never say bye
28-398-20-12-2013
Eye,eyes,restless,life

Dr.Rajendra Tela,Nirantar

कलम को क्यों दोष दूं


अच्छा नहीं
लिख पाया तो
कलम को
क्यों दोष दूं
उसने तो
कर्तव्य निभाया
मन के आदेश का 
पालन किया
अच्छा लिखा
लोगों ने सराहा
मेरा सीना चौड़ा हुआ
बुरा लिखा तो
मेरा दोष रहा
कलम को
कैसे कसूरवार
ठहराऊँ
कैसे बताऊँ
सच तो यह है
मनोदिशा के
अनुसार
लिखता रहा
जब मन खुश था
अच्छा लिखा
जब बेमन से लिखा
स्व्यं को भी
पसंद नहीं आया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
27-397-19-12-2013
जीवन,जीवन मन्त्र,दोष,दोषारोपण.प्रशंसा

बुधवार, 18 दिसंबर 2013

Colors of life


Rainbow
Colors fade
But When sunlight
Rips through
The water vapors
Rainbow reappears
So what if
My life colors have
Started  fading
Difficulties increasing
Age telling on the face
All these changes
  Doesn’t deter my
Attitude
I still feel I can fight
My age
Can be as energetic
As I was in my youth
At times
Even Laugh and play
Like a child
I am hopeful
My will to enjoy life
As I used to
Will act as sunlight
On the water vapors
Of hope
Resting on the
Shoulders of
My attitude
26-396-18-12-2013
Attitude,life,old age,hope,will

Dr.Rajendra Tela,Nirantar

The more I think


What to do when?
What not to do when?
The question
Always haunts me
The more I think
The more
Confused I am
I do
What should not be
Done
I do not do
What should be done
After committing
Many silly mistakes
I have decided
Not to think
To the level
I am confused
Do whatever
My conscience says
When ever
My conscience says
25-395-18-12-2013
Confusion,thinking,life,conscience
Dr.Rajendra Tela,Nirantar


मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

पानी नदी में भी होता है

पानी नदी में भी होता है
पानी नालों में भी होता है
समुद्र भी
पानी से भरा होता है
पीया वही जाता है
जो स्वच्छ होता है
पीने में मीठा होता है
इंसान वही भाता
जो मन से साफ़ होता है
वही लुभाता
जो ईर्ष्या द्वेष से
दूर रहता 
व्यवहार में नरम होता है
प्रेम से जीता है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
24-394-17-12-2013
जीवन,जीवन मन्त्र,ईर्ष्या द्वेष ,व्यवहार 

मन की प्रसन्नता


मन
प्रसन्न न हो
बलवान
निर्बल हो जाता
मन प्रसन्न हो
निर्बल को
बल मिल जाता
कितना भी पढ़ो लिखो
 मन प्रसन्न रखना
अवश्य सीखो

23-393-17-12-2013

मन,जीवन,प्रसन्नता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

सोमवार, 16 दिसंबर 2013

प्रश्न न्याय मिलने ना मिलने का नहीं है


प्रश्न न्याय मिलने
न मिलने का नहीं  है
प्रश्न कानून का है
न्यायधीश के मंतव्य का है 
न्याय प्रिय होने का है
भावनाओं में बहने का है
स्व्यं की
आस्थाओं से परे हट कर
सोचने का है
स्थितियों को समझने का है
सत्य पर विश्वास का है
मनुष्य को
मनुष्य समझने का है
 डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
22-392-16-12-2013
न्याय,न्यायधीश,मंतव्य,क़ानून ,जीवन,  

रविवार, 15 दिसंबर 2013

चले सब साथ साथ थे

चले सब साथ साथ थे
पढ़े भी साथ साथ थे
वही गुरु
वही पुस्तकें
वही शिक्षा
वही पाठ शाला
सब एक था
 कोई पथ भ्रष्ट हो गया
लालच में डूब गया
येन केन प्रकारेण
धन कमाने लगा
कोई संतुष्टि के
पथ से नहीं डिगा
जितना आवश्यक
उतना करता रहा
कौन ठीक 
कौन गलत था
जिस का जैसा सोच
उसने वैसे ही समझा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
 21-391-15-12-2013
जीवन,संतुष्टि,लालच,जीवन मन्त्र,सोच