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शनिवार, 14 दिसंबर 2013

जवानी ने साथ नहीं दिया तो क्या


जवानी ने
साथ नहीं दिया
तो क्या
ख़्वाबों में ख्यालों में
अब भी वही लोग
वही मंज़र वही बातें हैं
वही जज्बा 
वही इरादे वही शौक़
वही आदतें हैं
पहले भी ज़िंदगी
मस्ती में जीते थे
खुल कर हँसने का
मौक़ा ढूंढते थे
अब भी
मस्ती में जीते हैं
खुल कर हँसने की
कोशिश करते हैं
उम्र के इस दौर को
ज़िंदगी का
हिस्सा समझते हैं    
20-390-14-12-2013
बुढ़ापा,जीवन,उम्र,जवानी

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

आज सच कह ही देता हूँ


एक बार फिर
कहने की हिम्मत
करता हूँ
जान हथेली पर लेकर
काले को काला
सफ़ेद को सफ़ेद
कहने की
ज़ुर्रत करता हूँ
फिर कोई दोस्त
दुश्मन ना बन जाए
डरते डरते भी
आइना देखता
दिखाता हूँ
सच पूछो तो
मैं भी झूठा
तुम भी झूठे
आज सच 
कह ही देता हूँ

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
19-389-14-12-2013
सच,झूठ,जीवन,ईमान,बेईमान


शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013

दोस्तों से दुश्मन अच्छे


दोस्तों से 
दुश्मन अच्छे 
भले ही
जी भर के कोसते हैं
पर पल पल
याद करते हैं
निरंतर
खामियों को
उजागर करते हैं
झूठी प्रशंसा से
दूर रखते हैं
निरंतर 
चौकन्ना रखते हैं
आत्म मंथन के लिए
बाध्य करते हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर   
18-388-13-12-2013
दोस्त,दुश्मन,जीवन,मित्र

प्रतीक्षा के क्षण


प्रतीक्षा के क्षण
सोच का चक्रव्यूह
विचारों में
अंतर द्वंद्व
आशांकाओं से
घिरता ह्रदय
सम्भावनाएं
खोजता मन
मिलता नहीं चैन
जब तक
समाप्त नहीं होते
प्रतीक्षा के पल

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
17-387-13-12-2013

प्रतीक्षा,सोच,जीवन.अंतर्द्वंद्व ,चैन 

ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी


अब भीड़ के साथ
चलना प्रारम्भ कर दो
खुद को
ज़लालत से बचा लो
ज़माने को खुश कर दो
पकडे जाओ
उससे पहले ही
ईमान की परिभाषा
बदल दो
जो सब कर रहे हैं
उसे ही ईमान कह दो
ना रहेगा बांस
ना बजेगी बांसुरी
कहावत को
चरितार्थ कर दो
16-386-13-12-2013
ईमानदारी,ईमानदार,बेईमान,ज़िंदगी,
ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

गुरुवार, 12 दिसंबर 2013

सतह पर


रिश्ते नाते
मित्रता
संवेदनाएं
मन की
गहराइयों से
निकल कर
सतह 
पर आ गए हैं 
दिखाने हैं
इसलिए
निभाये जा रहे हैं
जो भी 
आवाज़ उठाये
सब उसे ही
दोषी कहने लगे हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
15-385-12-12-2013
संवेदनाएं ,रिश्ते,नाते,मित्रता,सम्बन्ध,जीवन

बुधवार, 11 दिसंबर 2013

जब तक खोलो नहीं लिफाफा


जब तक
खोलो नहीं
लिफाफा हर सन्देश
सीने में
दबा कर रखता है
सन्देश मन को
खुश करने का हो
ह्रदय को दुःख
पहुंचाने वाला हो
लिफाफा चुप रहता है
काश मनुष्य भी
लिफ़ाफ़े से सीख कर
सुख दुःख में
चुप रह पाता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
14-384-11-12-2013
जीवन ,सुख ,दुःख,लिफाफा,सन्देश

मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

कर्मों का लेखा जोखा


कर्मों का लेखा जोखा
===============
मन में
निरंतर प्रश्न उठते हैं
कर्मों का
लेखा जोखा मांगते हैं
जीवन का
बही खाता खोलता हूँ
उचित कामों से खुश
अनुचित से ब्यथित होता हूँ
मन से समाधान पूछता हूँ
एक ही उत्तर मिलता है
स्व्यं को बदल डालूं
उचित काम करता रहूँ
अनुचित का प्रायश्चित करूँ
दोबारा नहीं करने का प्रण लूं
मनुष्य बन कर जीऊँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
13-383-10-12-2013
कर्म,जीवन,जीवन मन्त्र,प्रायश्चित,उचित,अनुचित

अपराधी

बोलना चाहता था 
उसे बोलने नहीं दिया 
करना चाहता था
उसे करने नहीं दिया
उसे वही करने को 
बाध्य किया गया 
जो तुम चाहते थे
उसका 
अधिकार छीना गया 
उस पर 
अत्याचार होता रहा 
वह चुप रहा
उससे सहा नहीं गया  
वह बागी हो गया 
तुमने उसे 
अपराधी बना दिया 
अब उसे 
सजा देना चाहते हो 
उसका जीवन भी 
छीनना चाहते हो 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
12-382-10-12-2013
अपराधी,अधिकार,बागी,जीवन,अत्याचार,नक्सलवादी 

सोमवार, 9 दिसंबर 2013

उनके मौन हो जाने से

उनके 
मौन हो जाने से
उनकी कही बातें
मौन नहीं हो जाती
उनके कर्म 
प्रेरित करना  
बंद नहीं करते
उनका व्यवहार
मुझे अपना व्यवहार
बदलने के लिए बाध्य
करना नहीं छोड़ता
वो अब संसार में नहीं हैं
तो भी उनका सोच
मुझे राक्षस नहीं
बनने देता
मनुष्य के रूप में
अब भी अगर मनुष्य
बन कर जी रहा हूँ
उन महापुरुषों से
प्रेरित होने के कारण हूँ
जो खुद से अधिक
दूसरों के लिए जिए
जब तक जिए
निस्वार्थ जिए
संसार से गए तो भी
दूसरों के लिए गए


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
11-381-09-12-2013
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

जीवन,प्रेरणा,महापुरुष,,निस्वार्थ,    

क्या परमात्मा रूठ जाएगा ?


गंगा में
डुबकी नहीं लगाऊं  
चारों धाम नहीं जाऊं
सुबह शाम
पूजा अर्चना नहीं करूँ
तो क्या 
अधर्मी कहलाऊंगा
हर मंदिर के
दर्शन नहीं करूँ
तो क्या परमात्मा
रूठ जाएगा
सत्य के पथ पर  
चलता रहूँ
मन में मैत्री,मुदिता,
करुणा का भाव रखूँ
दूसरों के दुखों का
निवारण करूँ
निर्बल को बल दूं
तो क्या परमात्मा
खुश नहीं होगा 


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
10-380-09-12-2013
पूजा,अर्चना,परमात्मा,ईश्वर,
जीवन,मैत्री,करुणा,मुदिता,धर्म
(मुदिता=दूसरों की खुशी में खुश होना)   

  

रविवार, 8 दिसंबर 2013

परमात्मा का विचित्र नियम


परमात्मा का
विचित्र नियम है
संसार के
एक कोने में दिन
दूसरे में रात होती है
कहीं सुबह
कहीं शाम होती है
कहीं खुशी कहीं
दुखों की अति होती है
कहीं चेहरे पर हँसी
कहीं रुलाई होती है
इश्वर ने हर बात
तो बराबर बाँट दी 
मगर ना जाने
क्या सोच कर
इश्वर ने मनुष्य को
प्रेम कम
नफरत अधिक दे दी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
09-379-08-12-2013
संसार,परमात्मा,प्रेम ,नफरत .जीवन