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शनिवार, 7 दिसंबर 2013

वक़्त के साथ समझदार हो गए हैं हम


वक़्त के साथ
समझदार हो गए हैं हम
ग़मों को सीने में
दबा कर हँसते हैं हम
ज़ेब में खंज़र छुपाये
गले मिलते हैं हम
खुदगर्ज़ी में दोस्त को
दुश्मन बनाते हैं हम
मोहब्बत के नाम पर
मन में हवस रखते हैं हम
हर इंसान को
शक़ से देखते हैं हम
वक़्त के साथ
कितना बदल गए हैं हम
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
 08-378-07-12-2013
वक़्त,समय,जीवन,ज़िंदगी,इंसान,फितरत,बदलाव

सूर्यास्त के दुःख में


सूर्यास्त के दुःख में 
आकाश
रंग विहीन नहीं होता
लाल पीले नीले
श्वेत और ना जाने
कितने सुनहरी रंगों से
खुद को सजाता है
आकाश को पता है
जो आया है
वो जाएगा भी
नए जोश के साथ
अवतरित भी होगा
नव सूर्य के स्वागत में
सूर्यास्त से पहले ही
खुशियां मनाता है

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
07-377-07-12-2013
सूर्यास्त,आकाश,दुःख.म्रत्यु,जीवन


एक सी बातें


एक सी बातें
=========
कुछ अनजान
कुछ जान पहचान वाले
बहुत सारे लोग
मुझे हर दिन मिलते हैं
सब एक सी बातें करते हैं
सरकार को कोसते हैं
दरकते रिश्तों से
बिखरते संस्कारों से
व्यथित होते हैं
सारे संसार को
बेईमानी ईर्ष्या द्वेष से
त्रस्त बताते हैं
पर कोई नहीं कहता
स्थितियों को
पटरी पर लाने के लिए
वो क्या कर रहे हैं
सब चाहते हैं
स्थितियां अपने आप
ठीक हो जाएँ
वो हाथ पर
हाथ धर कर बैठे रहें
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
06-376-07-12-2013
जीवन,हाथ पर हाथ धर कर बैठना

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर   

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2013

इंसान अभी मरा नहीं है


सब कुछ बिगड़ा नहीं है
इंसान अभी मरा नहीं है
कुछ लोग अब भी अच्छे हैं
ह्रदय और मन से सच्चे हैं
परमात्मा से डरते हैं
निस्वार्थ जीवन जीते हैं
दूसरे के दुःख में रोते हैं
मानवता निभाते हैं
इंसान बन कर जीते हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
06-376-06-12-2013
मानवता,जीवन,इंसानियत,इंसान

सपना टूटा है ,हिम्मत नहीं


सपना टूटा है
हिम्मत नहीं
मन दुखी है
हताश नहीं
असफलता मिली है
निराशा नहीं
फिर इच्छा 
जाग्रत कर लूंगा
नया सपना संजो लूंगा
आशाओं के
शिखर पर चढ़ कर
हिम्मत मेहनत से
सफलता पा ही लूंगा
एक दिन
मैं भी हँस लूंगा


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
05-375-06-12-2013
सपना,असफलता,हिम्मत,आशाएं,जीवन,जीवन मन्त्र

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

टूटी पतवार


नदी के एक किनारे से
दूसरे किनारे तक
पहुँचने के उतावलेपन में
टूटी पतवार लेकर ही
नाविक चल पड़ा
जोश में भूल गया
नदी के बीच में
गहराई अधिक होती है
पतवार की मज़बूती भी
आवश्यक होती है
मंझधार में जब नाव
डगमगाने लगी
समझ नहीं पाया
आगे जाऊं या 
पीछे लौटूं
असमंजस में 
होश खो बैठा
नाव के साथ
खुद को भी डूबा बैठा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
04-374-05-12-2013
टूटी पतवार,उतावलापन,जोश,जीवन जीवन मन्त्र

बुधवार, 4 दिसंबर 2013

जीवन में संयम


जीवन में संयम
मकान की नीव के
समान होता है
कमज़ोर नीव का मकान
कभी सुढ्रढ नहीं होगा
सदा मकान के ध्वस्त
होने का ख़तरा रहेगा
ध्वस्त भी हो सकता है
विपत्ती का समय हो
संयम नहीं हो,
परिस्थितियाँ भी
विपरीत हों ,
मकान जैसा ही हाल
जीवन का भी 
हो सकता है 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
03-373-04-12-2013


जीवन,जीवन मन्त्र,संयम

ना होता म्रत्यु भय अगर


न होता म्रत्यु भय अगर
परमात्मा से 
डरता कौन 
न होता धन अगर
बेईमान बनता कौन
न होता सुन्दर चेहरा अगर
आसक्त होता कौन
न होता दर्द अगर

जीवन में रोता कौन
न होती कलम अगर
मनोभाव 
लिखता कौन 


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
04-372-04-12-2013
परमात्मा,म्रत्यु,जीवन,


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

सोमवार, 2 दिसंबर 2013

दुनिया लाख कहे अवगुण


दुनिया
लाख कहे अवगुण
जिस की रग रग में
बसा छल कपट
वो कहता उसे गुण
जिसने सहा बार बार
उसे लगता
हर मनुष्य दुश्मन
तोलता परखता
फिर भी नहीं
कर पाता विश्वास
ना खाये चोट दोबारा
डरा घबराया
संशय में जीता रहता

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
01-371-02-12-2013

गुण,अवगुण,छल कपट,संशय,विश्वास ,जीवन