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मंगलवार, 26 नवंबर 2013

अब और क्या क्या बंटेगा ?


धरती बंटी
मज़हब बंटे
भाषा बंटी 
जात बंटी 
घर बंटे
परिवार बंटे
रिश्ते बंटे
दिल बंटे
कब हम से
"मैं "
हुआ
पता ही नहीं चला
सोच में डूबा 
हूँ 
अब और
क्या क्या बंटेगा ?

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
33-370-26-11-2013

बँटवारा ,मज़हब ,भाषा,रिश्ते,जात पांत
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

सोमवार, 25 नवंबर 2013

आस अभी छोड़ी नहीं


आशाएं 
खरी नहीं उतरी
तो भी
मन निराशा नहीं
प्यार देने से
प्यार नहीं मिला
तो भी
कोई शिकायत  नहीं
रिश्तों से मोह 
अब भी टूटा नहीं
कोई तो होगा
जो प्यार के बदले में
प्यार देगा
आस अभी छोड़ी नहीं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
32-369-25-11-2013

मान्यताएं,प्यार,जीवन,जीवन मन्त्र,आस

रविवार, 24 नवंबर 2013

सच के पथ पर


सच के
पथ पर चलना
आसान नहीं होता
खुद पर
यकीन नहीं होता तो
गलतफहमियों का
शिकार हो गया होता
सब्र नहीं रखता तो
कब का चुक गया होता
जज़बा नहीं होता तो
हार मान चुका होता
लोगों के कहने की
परवाह करता रहता
तो टूट गया होता

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
31-368-24-11-2013
जीवन,जीवन मन्त्र,सत्य,सब्र,जज़बा