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शनिवार, 16 नवंबर 2013

कुछ लोग इतिहास लिखते हैं


कुछ लोग
इतिहास लिखते हैं
कुछ लोग 
इतिहास पढ़ते हैं
कुछ कर्मों से
इतिहास बनाते हैं
आने वाली पीढ़ियों को
प्रेरणा का प्रसाद देते हैं
जो कर्मों को
आत्मसात कर लेते है
 जीवन लक्ष्य बना लेते हैं
ऊंचाइयां छूते हैं
जो आत्मसात नहीं करते
वो उन्हें इतिहास
समझ कर कभी कभास
याद कर लेते हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
18-355-16-11-2013
जीवन,जीवन मन्त्र, लक्ष्य,इतिहास,कर्म,

शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

नफरत का बीज


मन में पड़े
नफरत के बीज को
अगर अहम् से सींचा
पौधा तो बढ़ेगा ही
रिश्ते को भी
तार तार करेगा
खुद को भी
कहीं का नहीं रखेगा 
मन को इतना
कमज़ोर कर देगा
ज़िंदगी भर
चैन को तरसेगा
मगर मिलेगा नहीं
संसार से बेचैन ही
विदा होना पडेगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
17-354-15-11-2013
नफरत,अहम्,चैन,जीवन,जीवन मन्त्र







बुधवार, 13 नवंबर 2013

मित्र बोला मित्र से


मित्र बोला मित्र से
मेरा तुम्हारा ये
कैसा रिश्ता
ना जात धर्म एक
ना खून खानदान एक
ना रंग रूप एक
ना कद काठी एक
ना विचारों में समानता
ना धंधा ना उम्र एक
मित्र ने जवाब दिया
कुछ और मिले ना मिले
कोई फर्क नहीं पड़ता
केवल मन से मन
मिलना चाहिए
एक दूसरे पर विश्वास
होना चाहिए
मित्रता का बस यही
पैमाना होता है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
16-353-13-11-2013
जीवन,जीवन मन्त्र,मित्र,दोस्त,मित्रता

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

मंगलवार, 12 नवंबर 2013

अपने लिए तो सब जीते हैं

अपने लिए तो 
सब जीते हैं 
कुछ लोग 
दूसरों के लिए भी 
जीते हैं
अपना सुख छोड़ 
दूसरों के दुःख 
कम करने में ही 
चैन पाते हैं
मंतव्य पर 
प्रश्न चिन्हों की 
परवाह करे बिना 
मनुष्य 
बन कर जीते हैं
विचलित हुए बिना 
लक्ष्य प्राप्ति के लिए 
निरंतर 
अग्रसर रहते हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर,
16-353-12-11-2013

लक्ष्य,पथ,चैन,मनुष्य,जीवन,सार्थक सोच,जीवन मन्त्र 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर,

सार्थक योगदान



कम होती मर्यादाओं
ईर्ष्या द्वेष की
कहानियों से
व्यथित हो कर
ना तो दिन में 

चुप चाप बैठता हूँ
ना रात के अँधेरे से
डरता हूँ
दिन में हँसते चेहरों
खेलते बच्चों को
देख कर खुश होता हूँ
रात में शीतल चांदनी
रात रानी की सुगंध से
मन को चैन देता हूँ
कैसे बदलती
स्थितियों को
बदलने में
सार्थक योगदान दे
सकता हूँ
मनन चिंतन कर
अपने सोच को
मूर्त रूप देता हूँ 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
15-352-11-11-2013
जीवन,सार्थक सोच,जीवन मन्त्र ,योगदान


सोमवार, 11 नवंबर 2013

मन का शोर


कभी सोचता था
दुनिया का शोर
चैन से जीने नहीं देता
खुद ने भुगता तो
पता चला
मन का शोर
हर शोर से अधिक
खतरनाक होता है
दिन रात
हाहाकार मचाता
जीना दूभर कर देता 
ना जीने देता
ना मरने देता 
इंसान को
बेबस कर देता है
14-351-11-11-2013 
व्यथा,दुःख,जीवन,मन ,शोर, हाहाकार

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

रविवार, 10 नवंबर 2013

बुरे समय में


बुरे समय में
कलम द्रुत गति से
चलती है
समस्त व्यथाएं
कुछ शब्दों में
मन के चक्रव्यूह से
बाहर निकल जाती हैं
कोई पढ़े ना पढ़े 
लेखक को
लिख कर ही
शांति मिल जाती है

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
13-350-10-11-2013 


कलम,मन,व्यथा,लेखक,जीवन

आओ आज कुछ नया किया जाए


आओ आज 
कुछ नया किया जाए 
दिन भर 
केवल सच बोला जाए 
किसी का 
दिल ना दुखाया जाए 
त्रुटियों को 
सर झुका कर माना जाए 
दुश्मनों के 
लिए भी दुआ करी जाए
दूसरों की बात भी सुनी जाए
मुश्किलों को भूला जाए 
इच्छाओं को 
विश्राम दे दिया जाए
जी भर के हँसा जाए 
लोगों को भी हँसाया जाए
आओ आज 
कुछ नया किया
जाए
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
12-349-10-11-2013 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

जीवन,जीवन मन्त्र, नया,सोच