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शनिवार, 2 नवंबर 2013

कही बात,लिखी बात,सुनी बात


कही बात,
लिखी बात,सुनी बात
समझ नहीं आये
मन को नहीं भाये
तो व्यर्थ है
समझ आ जाए
मन को भा जाए तो
कहने वाले लिखने वाले
सुनाने वाले का
उद्देश्य सफल है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 02-342-02-11-2013
संवाद,बात चीत,लिखना,कहना,सुनना,जीवन ,समझना, 

शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

अस्त होते सूरज को,कौन जल चढ़ाता है


कल फिर पूजेंगे
जल चढ़ाएंगे
नत मस्तक हो जाएंगे
जानते हुए भी
अस्त होते सूरज को
कोई जल नहीं चढ़ाता

मनुष्य वो जीव है
जो त्वरित लाभ में
जीता है
भविष्य की चिंता में
डूब कर भी
स्वार्थ से हार जाता है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
01-341-01-11-2013
स्वार्थ,जीवन,जीवन मन्त्र

गुरुवार, 31 अक्तूबर 2013

दिल दर्द से इतना भर गया है


दिल दर्द से
इतना भर गया है
जीना अब
दुश्वार हो गया है
ना खुल कर
रोया जाता है
ना अपनों को
छोड़ा जाता है
वक़्त के
चौराहे पर खडा हूँ
रास्ता नज़र नहीं
आता है
खामोशी से सहना
आदत में
शुमार हो गया है
खुदा से दुआ
अब दवा हो गया है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
33-340-31-10-2013
ज़िंदगी,दुआ,गम,शायरी,दर्द

इच्छाएं भूलता भी हूँ इच्छाएं रखता भी हूँ


इच्छाएं भूलता हूँ
पर एक इच्छा
प्रयत्न करने के 

बाद भी
भूल नहीं पाता
हर दिन परमात्मा से
प्रार्थना करता हूँ
संसार से जाऊं तो
लोगों के मनों में
मेरे कर्मों के हस्ताक्षर
अवश्य कर के जाऊं
कोई मुझे याद करे ना करे
मेरे कर्मों को याद करे
इंसान के रूप में जानें
बस इतना सा चाहता हूँ 

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
32-339-31-10-2013 
जीवन,जीवन मन्त्र, इच्छाएं,कर्म

बुधवार, 30 अक्तूबर 2013

अपनों को पराया बनते देखा है


अपनों को
पराया बनते देखा है
परायों को भी
अपना बनते देखा है
पर कभी 
समझ नहीं पाया
जितना शीघ्रता से 
अपने पराये हो जाते 
क्यों पराये 
अपने नहीं हो पाते
नए रिश्ते
 बनाने से पहले
डरते सहमते हैं
हो सकता है 
दूध के जले हों
छाछ को भी 
फूंक कर पीते हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
31-338-30-10-2013
रिश्ता ,रिश्ते,सम्बन्ध,जीवन,जीवन मन्त्र

कल तक मिलते थे


कल तक मिलते थे
साथ हँसते थे
साथ रोते थे
हर लम्हे का
हिसाब लेते देते थे
आज पहचानते भी नहीं
समझ नहीं पाता
समझना भी नहीं चाहता
क्यों और कैसे
ऐसा करते हैं लोग
मैं ऐसा ही रहना चाहता
रिश्तों को खेल नहीं
समझा कभी
ना ही समझूंगा कभी
उनके जैसा मज़बूत
दिल नहीं है मेरा
रिश्तों को
आसानी से तोड़ दूं
और दिल रोये भी नहीं
मैं कमज़ोर ही रहना
चाहता
रिश्तों को भरपूर जिया है
आगे भी जीना चाहता हूँ   
30-337-30-10-2013
रिश्ता ,रिश्ते,सम्बन्ध,जीवन,जीवन मन्त्र

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

मंगलवार, 29 अक्तूबर 2013

सामंजस्य हो तो


कभी शरीर
विश्राम चाहता है
मन नहीं
कभी मन
विश्राम चाहता है
शरीर नहीं
दोनों ही अवस्था में
ह्रदय 
व्यथित होता है
जब ह्रदय
व्यथित होता है
ना मन को
ना शरीर को
चैन मिलता है
अगर तीनों में
सामंजस्य हो तो
जीवन खुशी से
गुजरता है
नहीं हो तो 

व्यथा में कटता है 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
29-336-29-10-2013

सामंजस्य,मन,ह्रदय,शरीर,जीवन,जीवन मन्त्र, व्यथा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

मसीहा

बेचैन मन को
जब मिलती नहीं
मुक्त होने की राह कोई
मन ढूंढने लगता है
एक राह नयी
जो भी हँस कर मिल ले
मीठी बातें कर ले
वही लगने लगता है
मिल गया मसीहा कोई
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
28-335-29-10-2013

मसीहा, बेचैनी,मन,जीवन,जीवन मन्त्र

सोमवार, 28 अक्तूबर 2013

मन को पढ़ पाता अगर


मन को 
पढ़ पाता अगर
जबान पर 

यकीन नहीं करता 
चेहरा देख कर ही 

सत्य जान लेता
कई आफतों से 
बच जाता
दूसरों को भी बचा लेता 
खोखले रिश्तों से
धोखे से 
मुक्त हो जाता
कोई मित्र कभी
दुश्मन ना बनता
हर इन्सान को
शक से नहीं देखता
निडर हो कर जीता  

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
27-334-28-10-2013

मन,जीवन,जीवन मन्त्र,शक

धोखा नहीं खाना चाहो तो


जीवन में धोखा नहीं
खाना चाहो तो विश्वास 
मत करो किसी पर
ऐसा करने से पहले
इतना सा जान लेना
आशा भी मत रखना
दूसरा करेगा
विश्वास तुम पर
अगर यह मान्य तुमको
मत करना विश्वास
किसी पर
मान्य नहीं तो 

करते रहो
विश्वास लोगों पर
ऐसा करने से पहले
अनुभव और
विवेक काम में लो
गहराई से सोच 
कर
निर्णय करो
किस पर करना
किस पर नहीं करना
विश्वास  तुम को

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
26-333-28-10-2013

जीवन,जीवन मन्त्र,विश्वास,धोखा,विवेक,अनुभव

रविवार, 27 अक्तूबर 2013

उसे अपशब्द कहते समय


उसे अपशब्द
कहते समय
ध्यान नहीं आया
उत्तर में वो भी
अपशब्द कह सकता है
पर जब उसने
अपशब्द कहे
मेरा खून खौलने लगा
प्रत्युत्तर में
उसे पहले से भी अधिक
अपशब्द कहने ही वाला था
तभी मन में विचार आया
इस तरह तो सिलसिला
कभी समाप्त नहीं होगा
बात अपशब्दों तक
सीमित नहीं रहेगी
सदा के लिए दुश्मनी में
बदल जायेगी

क्रोध पर नियंत्रण किया
ह्रदय को कडा कर
मुस्काराकर 
केवल इतना कहा
मित्र मुझे क्षमा करना
त्रुटी मेरी ही थी
वो भी मुस्काराकर बोला
मित्र अब भूल भी जाओ
पहले ही कह देते तो
बात नहीं बढ़ती

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
25-332-27-10-2013

अपशब्द,व्यवहार,जीवन,जीवन मन्त्र,

मेरी ख्वाहिशों ने मेरे अरमानों से पूछा

मेरी ख्वाहिशों ने 
मेरे अरमानों से पूछा
हमें मुकाम कब मिलेगा
अरमानों ने खुदा से पूछा
हमें मुकाम कब मिलेगा
खुदा ने जवाब दिया
देना ना देना मेरे हाथ है
कब देना कितना देना
भी मेरे हाथ में है
पर उससे पहले
अपने मन से पूछो
क्यों काबूं में नहीं रहता
क्यों दिन रात
नयी ख्वाहिशें करता
नए अरमान रखता
आज दे दूंगा तो
कल फिर मांगोगे
पहले मन को काबू  में करो
फिर जो मांगोगे दे दूंगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
24-331-27-10-2013
अरमान,इच्छाएं,मन,ख्वाहिश,खुद,जीवन,जीवन मन्त्र