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शनिवार, 19 अक्तूबर 2013

हिम्मत अभी बाकी है


उम्र जीवन के 
किनारे पर खडी है
पर हिम्मत अभी बाकी है
दिए का तेल कम
हो चुका है
पर बाती में दम
अभी बाकी है
इमारत का रंग रोशन
धुंधला पड़ चुका है
पर नीव में मजबूती
अभी बाकी है
लक्ष्य तो मिला नहीं
पर आशा अभी बाकी है
नींद भी कम हो गयी है
पर स्वप्न लोक में
विचरण की इच्छा
अभी बाकी है
सूर्यास्त समीप है
पर  नित्य नया सवेरा
देखने की आस
अभी बाकी है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
13--320-19-10-2013
(स्वावलंबी एवं बुढ़ापे में हिम्मत नहीं हारने वाले ,मेरे ९३ वर्षीयपिताजी  एवं ९० वर्षीय मेरी माताजी को समर्पित कविता)

बुढापा,जीवन,जीवन मन्त्र,आशा,

शुक्रवार, 18 अक्तूबर 2013

माएँ एक जैसी होती हैं

खिड़की के
बाहर द्रष्टि पड़ी
पेड़ पर लगे घोंसले में
चिड़िया नन्हे चूजे को
दाना खिलाती दिखी
उड़ कर जाती ,
चोंच में दाना दबा कर
लौट आती
स्नेह से चूजे को
दाना खिलाती
निरंतर यही क्रम
चलता रहा
चूजे का पेट भरने के
बाद ही चिड़िया ने
खाना प्रारम्भ किया
द्रश्य देख कर मुझे
माँ का चेहरा
याद आ गया
विश्वास सुद्रढ़ हुआ
समस्त माएँ
एक जैसी होती हैं
पहले बच्चों का
पेट भरती  हैं
बाद में खुद खाती हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
12--319-18-10-2013


माँ,चिड़िया,चूजा ,जीवन,मातृत्व,ममता  

गुरुवार, 17 अक्तूबर 2013

बारिश भी रुक जायेगी


बारिश भी रुक जायेगी
चढी नदी भी उतर जायेगी
धरा पर हरयाली  भी
छा जायेगी
सुनहरी धूप भी खिल
जायेगी
किसानों की आँखें भी
चमक जायेगी
पर नहीं लौटेगी जान
जो बहते पानी ने लील ली
नहीं रुकेंगे आँखों के आंसू
नहीं लौटेगी चेहरे पर हँसी
सदा के लिए जिनकी
ज़िन्दगी ही बदल गयी
किसी अपने की
जान चली गयी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
11--318-17-10-2013
प्रकृति,विनाश.जीवन,म्रत्यु,बाढ़,नदी

बुधवार, 16 अक्तूबर 2013

आस्था और विवेक के बीच


जीवन भर आस्था
और विवेक के बीच
झूलता रहता है मनुष्य
मानूं ना मानों के
झंझावत में
फंसा रहता है मन
एक ओर कुआ
दूसरी ओर खाई है
माने तो
कुंठा ग्रस्त होता है मन
नहीं माने तो
अधर्मी कहलाने का डर
कभी कभी बेमन से
सर झुका कर 
निभाता रहता है
धर्म
10--317-16-10-2013
आस्था,विश्वास,परमात्मा,धर्म,इश्वर ,जीवन, विवेक

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  

मेरे आज ने पूछा मेरे कल से


मेरे आज ने पूछा
मेरे कल से
आज क्या नहीं है
मेरे पास
जो कल नहीं था
मेरा कल बोला
पहले से
सब अधिक है
तुम्हारे पास
धन,उम्र अनुभव,
परिवार और
ढेर सारी यादें
रोने के
सैकड़ों बहाने भी हैं
पर जो आज नहीं है
पर कल होता था
वह है
निश्चिंतता
खुल कर
हँसने की शक्ति
चैन भरी नींद
दर्द रहित शरीर
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
09--316-16-10-2013
बुढापा,जवानी,बचपन,जीवन ,आज,कल

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

मंगलवार, 15 अक्तूबर 2013

बना कर मिटाना,मिटा कर बनाना

बना कर मिटाना
मिटा कर बनाना
कर्मों की कसौटी
पर तोलना
किसी को स्वर्ग
किसी को नर्क भेजना ही
क्या काम परमात्मा का
न कोई प्रश्न पूछता
न कोई उत्तर देता
सब कुछ 
आस्था के दृढ स्तम्भ
मन के विश्वास पर टिका है
धर्म की डोरियों से बंधा है

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
08--315-15-10-2013
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

आस्था,विश्वास,परमात्मा,धर्म,इश्वर ,जीवन,स्वर्ग,नर्क

सोमवार, 14 अक्तूबर 2013

ग़मों से गुजारिश है

ग़मों से गुजारिश है
मुझे छोड़ कर
दूसरी जिंदगी में
ज़ुल्म ना ढाए
मुझे तो आदत है
निरंतर ज़ख्म खाने की
खामोशी से दर्द सहने की
मुझे तो मिल नहीं सका
सुकून जिंदगी में
किसी को बेसुकून
होने से बचा सकूं
ग़मों से लड़ने के लिए
जिंदगी जीने के लिए
इतना ही सुकून काफी है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
07--314-14-10-2013

शायरी,गम,सुकून,दर्द ,जिंदगी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Romance of the minds


I adore her
I admire her
At my command
I respect her
She respects me
Waits to hear from me
When I am depressed
Patiently listens to me 
Motivates me
Her soothing words
Act as a medicine for me
Elevates my mood
She makes me smile
Devoid of
Any sexual urge
Sincerity and Purity
Are the crux
Of our relationship
Romance of our minds
Keeps our friend ship
Going
24-01-2012
75-75-01-12