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शनिवार, 20 जुलाई 2013

हमने देखी है दोस्तों में मुर्रवत इतनी

हमने देखी है
दोस्तों में मुर्रवत इतनी
चोट हमारे लगती 
आह उनकी निकलती 
अब देखते हैं
अपनों की मोहब्बत इतनी
हमारे चोट लगती 
उनकी हँसी निकलती 
भूल जाते हैं
फितरत में अपनी
जब दर्द से होगी
मुलाक़ात उनकी
हर चेहरे पर खुशी होगी
कोई आँख नम नहीं होगी
चीखेंगे चिल्लाएँगे तो भी
कोई आवाज़ 
उनका साथ नहीं देगी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर -अजमेर
25-117-20-07-2013
दोस्ती,फितरत ,मोहब्बत,नफरत ,शायरी,नज़्म

क्या अधूरा नहीं है


क्या अधूरा नहीं है
इच्छाएं अधूरी रहती हैं
आशाएं अधूरी रहती हैं
ज्ञान अधूरा रहता है
भावनाएं अधूरी रहती हैं
कोई रिश्ता पूरा नहीं होता
कोई मनुष्य सम्पूर्ण नहीं
जीवन भी सब का पूरा नहीं
हर बात अधूरी रहती है
फिर रोना किस बात का
क्यों पूर्णता के
भ्रमजाल में फंसते हो
आकाश छूना चाहते हो
मन की व्यथा बढाते हो
अधूरे को भी आधा करते हो
जितना कर सकते हो
उतना अवश्य करो
संतुष्ट रहना भी सीख लो
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
24-116-20-07-2013
अधूरा,अधूरी,संतुष्ट,असंतुष्ट ,जीवन,पूर्णता

शुक्रवार, 19 जुलाई 2013

हवा जब वृक्षों से आलिंगन करती है


हवा जब वृक्षों से
आलिंगन करती है
पत्ता पत्ता
डाली डाली झूमने
लगती है
 पत्तों को चूम कर
जब सरसराती हुई
अपने कर्तव्य पथ पर
अग्रसर होती है
खेत खलिहान,
नदी पहाड़ों से मिलने
निकल जाती है
लगता है
मानो सन्देश दे रही हो
प्रेम का अर्थ साथ
रहना ही नहीं होता
दूर रह कर भी
प्रेम करा जा सकता है
प्रेम के लिए 
कर्तव्य पथ से भटकना
 प्रेम नहीं होता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
23-115-19-07-2013
कर्तव्य पथ, सन्देश, प्रेम, कर्तव्य

सब्र का पैमाना

लोगों के सब्र का 
पैमाना
इतना छलक चुका है
अहम् इतना बढ़ चुका है
कौन कब रूठ जाएगा
अब पता ही नहीं चलता
बात सोच समझ कर
कही गयी हो
जाने अनजाने में मुंह से
निकली हो
कौन सी बात कब शूल
जैसे चुभ जाएगी
मन में आग लगाएगी
पता ही नहीं चलता
भले के लिए दी गयी
सीख भी कब तांडव
मचाएगी
रिश्तों को जला कर
ख़ाक कर देगी
मामूली हँसी ठिठोली
कब वीभत्स रूप ले लेगी
कोई नहीं जानता
कौन कब रूठ जाएगा
अब पता नहीं चलता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
22-114-19-07-2013
सब्र,अहम् सहनशीलता,जीवन,

गुरुवार, 18 जुलाई 2013

मन के बीहड़ में


मन के बीहड़ में
जब बहम की दीमक
पाँव फैलाने लगती हैं
विश्वास के वृक्षों की
जडें खोखली होने
लगती हैं
वृक्ष सूखने लगते हैं
अविश्वास की
कंटीली झाड़ियाँ
जन्म लेने लगती हैं
हिम्मत की मिट्टी
भुरभुरी हो कर
धसने लगती है
जीवन की गति
धीमी हो कर
पथ से भटकने
लगती है
किसी की सलाह
काम नहीं आती है
हर बात कडवी
लगती है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
21-113-18-07-2013
बहम,जीवन, अविश्वास

सोने ना दिया


रात में सोने ना दिया
दिन में जागने ना दिया
हमसे वक़्त का
लम्हा लम्हा छीन लिया
ज़िन्दगी का कतरा कतरा
अपने नाम कर लिया
उसकी मोहब्बत ने
हमें चैन से रहने ना दिया
डा.राजेंद्र तेला ,निरंतर
20-112-18-07-2013
मोहब्बत,चैन,प्यार,शायरी,नज़्म,यादें    

हर नया दिन

हर नया दिन
एक कोरा कागज़
दिखता है
पर कोरेपन के पीछे
छिपी होती हैं
असीम कुंठाएं
अनगिनत यादें
अनेकानेक इच्छाएं
अपार आशाएं
मन का 
संतुलन बना रहे
इच्छाएं आकान्शाएं
पूरी हो जाएँ
कुंठाएं कम हो जाएँ
तो दिन अच्छा 
लगता है
नहीं तो और दिनों जैसे
भूलने का मन 
करता है
कोरापन लिए
अतृप्त मन
एक और नए दिन की
खोज में भटकता है
20-112-18-07-2013 
नया दिन ,जीवन,कुंठा,इच्छाएं,आकान्शाएं,कोरा कागज़,मन

डा.राजेंद्र तेला ,निरंतर 

बुधवार, 17 जुलाई 2013

बात सच्ची थी मगर अनजाने में हुयी गलती थी


बात सच्ची थी मगर 
अनजाने में हुयी गलती थी 
ये नहीं समझा तुमने 
बस बात को ह्रदय से लगा लिया 
हर गुहार को अनदेखा कर दिया  
रिश्तों में अवरोध खडा कर दिया 
कुंठित मन का सबूत दे दिया 
अब भी कुछ बिगड़ा नहीं 
बस एक कदम आगे बढ़ाना है  
बहम का पर्दा मन से हटाना है
ह्रदय के पट खोल कर 
कहाँ ज़ख्म लगा बताना है
दो कदम मैं भी आगे बढूंगा 
सच्चाई को स्वीकार करूंगा
चाहोगे तो विछोह की सज़ा 
भुगतने के बाद 
और सज़ा भी भुगत लूंगा
रिश्तों के बीच से अवरोध हटा दूंगा 
मन में छाये 
बहम के काले बादलों को
सदा के लिए हटा दूंगा 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
19-111-17-07-2013

रिश्ते,बहम,शक,सम्बन्ध ,

मेरी ख़ामोशी का मतलब


मेरी ख़ामोशी से
मत समझना
तुम्हे चाहा नहीं ,
तुम्हे पाया तो नहीं ,
फिर भी खोया नहीं
खवाबों ख्यालों मैं,
रहती दखल तुम्हारी,
खबर जब आती 
तुम्हारी,
जाग उठती है,
चाहत मेरी
तुम्हें याद करता हूँ,
सजदा दिल से 
करता हूँ
जहाँ भी रहो खुश रहो,
बस ये ही दुआ 
करता हूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
18-110-17-07-2013
ख्वाब,ख्याल,चाहत,मोहब्बत,खामोशी,दिल

मंगलवार, 16 जुलाई 2013

त्वरित न्याय


त्वरित न्याय
=========
छ महीने पहले किसी ने
भीड़ भरे बाज़ार में
उसके पती का क़त्ल
कर दिया
निश्चिंतता से हाथ में
हथियार में लिए
भीड़ में गुम हो गया
आज अदालत ने
कातिल को बरी कर दिया
जल्दी फैसला करने पर
जज साहब की भारी
प्रशंसा हुयी
शान में स्वागत 
समारोह हुआ
जज साहब ने भाषण दिया
त्वरित न्याय में
उनका अटूट विश्वास है
न्याय में देरी से
न्याय का हनन होता है
वो कौने में खड़ी आसूं
बहा रही थी
किसी के गवाही नहीं
देने की बात
उसे समझ नहीं
आ रही थी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
17-109-16-07-2013
त्वरित न्याय
न्याय ,अन्याय

सोमवार, 15 जुलाई 2013

हम खुद बदलते नहीं


हम खुद बदलते नहीं कभी 
दूसरे बदल जाएँ  कैसे कहें
खुद नकाब लगा कर रहते हैं
लोगों को दोगला कैसे कहें
खुद दिल में नफरत रखते हैं
प्यार से जीने के लिए कैसे कहें
हम जहन में हवस रखते हैं
पाक रहने के लिए कैसे कहें
हम करते बेईमानी हर दिन
ईमान से जीने के लिए कैसे कहें
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
16-108-13-07-2013
प्यार,नफरत,ग़ज़ल,ज़िन्दगी,शायरी,दोगलापन ,ईमान,जीवन

रविवार, 14 जुलाई 2013

उम्र में बड़ा होना तुम्हें अधिकार नहीं देता


उम्र में बड़ा होना
तुम्हें अधिकार नहीं देता
छोटों को
कुछ भी कह दो तुम
अपना बचपन याद करो
उचित बात पर भी
जब बड़ों की
उचित अनुचित बात
सुनते थे तुम
मन में तिलमिला कर
चुप रह जाते थे तुम
समय बदल गया 
सोच बदल गयी 
इतना सा याद रख लो तुम
सम्मान पाना है तो
सम्मान देना पडेगा
कब कहना ,कितना कहना
किस को कहना ,क्या कहना 
ध्यान रखना होगा
बस इतना सा समझ लो तुम
यह सीख नहीं
जीवन का अनुभव है
जितना औरों ने सहा
उतना नहीं सहना है तो
उम्र में छोटों के मन को
समझना प्रारम्भ कर दो तुम
उनसे कम से कम
कहना सीख लो तुम
15-107-13-07-2013
उम्र,जीवन,छोटा,बड़ा,

 डा.राजेंद्र तेला,निरंतर