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शनिवार, 20 अप्रैल 2013

हास्य कविता-रिश्वत मांगना अब मेरा भी धर्म हो गया है



सरकारी डाक्टर की पत्नी ने
पति से बुखार की दवाई मांगी
डाक्टर ने तुरंत फीस मांग ली
पत्नी बिफर गयी
झल्ला कर बोली
कैसे इंसान हो ज़रा भी
शर्म नहीं आती
पेशे को बदनाम करते हो
पत्नी से भी रिश्वत मांगते हो
डाक्टर पति बोला
नाराज़ मत हो भागवान
कभी समझा भी करो
देश के नेताओं की तरह
रिश्वत मांगना
अब मेरा भी धर्म हो गया है
मेरी रग रग में समा गया है
रिश्वत नहीं लूंगा तो
धर्म का पालन कैसे करूंगा
तुम्हें मुफ्त में देख लूंगा तो
खुद डिप्रेशन में बीमार हो जाऊंगा
इलाज के लिए दूसरे डाक्टर को
देने के लिए फिर रिश्वत के
पैसे कहाँ से लाऊंगा
27-83-16-02-2013
हास्य,हास्य कविता,हँसमुखजी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
(रिश्वत में फीस नहीं लेने वाले
सरकारी डाक्टरों से क्षमा याचना सहित )

शुक्रवार, 19 अप्रैल 2013

प्यार मोहब्बत सब झूठी बातें



प्यार मोहब्बत
सब झूठी बातें
रिश्ते नाते
सब झूठी बातें
जब तक दूसरों के
मन की नहीं करो
सारे बातें
बेकार की बातें
26-82-16-02-2013
प्यार ,मोहब्बत,रिश्ते ,नाते
 डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  

गुरुवार, 18 अप्रैल 2013

पता नहीं कब हँसना होगा



पता नहीं
कब हँसना होगा
पता नहीं
कब तक सहना होगा
अगर यही जीवन है
तो क्या
हर पल लड़ना होगा
ऐसे ही जीना होगा
ऐसे ही जाना होगा
अगर पता होता
तो कुछ हँसी
सम्हाल कर रख लेता
जब मन करता हँस लेता
25-81-16-02-2013
हँसना, सहना, जीवन
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

बुधवार, 17 अप्रैल 2013

कैसे बताऊँ



कैसे बताऊँ
तुम्हें कितना चाहता हूँ
तुम इस कदर
नफरत करने लगे हो
गर सीना चाक कर भी
दिल पर लिखा
तुम्हारा नाम दिखा दूं
तो भी कह दोगे
दिल ही मेरा नहीं है
24-80-16-02-2013
नफरत,मोहब्बत
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

हर देशवासी को भाई बना देता


काश
मराठी लिख पाता
गुजराती पढ़ पाता
बंगाली समझ पाता
तमिल में गा पाता
कन्नड़ बोल सकता
तेलुगु में हँसी
मज़ाक कर सकता
पंजाबी में प्यार जताता
उडिया में गीत गाता
उर्दू में शेर सुनाता
कश्मीरी दोस्त बनाता
भोजपुरी  फिल्म देखता
संस्कृत में संस्कृति
ज्ञान कराता
हर देशवासी को
हिंदी सिखा देता
एक सूत्र में बाँध देता
देश प्रेम को धर्म
हर देशवासी को
भाई बना देता
33-89-16-02-2013
मराठी,गुजराती ,बंगाली
तमिल,कन्नड़,तेलुगु ,पंजाबी
उडिया,उर्दू,कश्मीरी,भोजपुरी 
संस्कृत देश,देशवासी
हिंदी,देश प्रेम
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

जब तक तुम मुझे अच्छे लगते हो



जब तक तुम
मुझे अच्छे लगते हो
तुम्हारी हर बात
मुझे अच्छी लगती रहेगी
पर कब तक
जब तक हमारे मन से
मन मिलते रहेंगे
जब अहम् अहंकार की
खाइयां जन्म लेने लगीगी
तुम मेरे लिए
 मैं तुम्हारे लिए
सबसे बड़े दुश्मन हो जायेंगे
दोनों के असली चेहरे
उजागर हो जायेंगे  
23-79-16-02-2013
अहम् ,अहंकार, जीवन  ,रिश्ते
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  

सोमवार, 15 अप्रैल 2013

कौन सदा हुआ किसी का



कौन सदा हुआ किसी का
किसने सदा साथ निभाया
किसी का
दो जिस्म एक जान भी
बिछड जाते एक दिन 
एक रह जाता एक चला जाता 
क्यों उम्मीद करते हो तुम
बिछड़ेंगे नहीं कभी हम तुम
मन में झूठी आशाएं बांधते हो 
सच से दूर रहते हो तुम
कठोर मन से सच स्वीकार लो 
हमें भी इक दिन अलग होना है
किसी को पहले 
किसी को बाद में जाना है
छोड़ दो मोह जी लो खुशी से
जब तक जीना है सुख दुःख में
साथ निभाना है 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
22-78-15-02-2013
जीवन,साथ ,साथी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

रविवार, 14 अप्रैल 2013

अकेला चला था



अकेला चला था
ज़िन्दगी के सफ़र में
लोग मिलते रहे रास्ते में
काफिला बनता गया
हकीकत से बेखबर था
सोचा था काफिला चलेगा
मंजिल पर पहुँचने तक
काफिला बिखरता गया
हर शख्श साथ छोड़ता  गया
जहाँ से चला था
फिर वहीँ पहुँच गया
अकेला चलना शुरू किया था
आज फिर अकेला रह गया
21-77-14-02-2013 
ज़िन्दगी, काफिला, अकेला
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

कैसा ज़माना आ गया है



कैसा ज़माना आ गया है
लोग चाहते हैं
भीड़ में शामिल हो कर
भीड़ में शामिल लोगों की
वाही वाही करो
काले को सफ़ेद
सफ़ेद को काला कहो
धमकी देते हैं
नहीं करोगे तो भीड़ से
निकाल दिए जाओगे
इंसान कैसा भी हो
हमें सीधे सच्चे
लोगों की ज़रुरत नहीं है
हम ज़माने के साथ चलते हैं
हमें हाँ में हाँ
मिलाने वालों की ज़रुरत है
जो नहीं मिलाये
वो जात बाहर है
हमारे लिए बेकार हैं
20-76-13-02-2013
भीड़,ज़माना,कैसा ज़माना आ गया ,भीड़ 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर