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शनिवार, 9 फ़रवरी 2013

मेरे मन की सड़क में



मेरे मन की सड़क में
गलियाँ ही गलियाँ
गलियों के अन्दर भी
कई गलियाँ
असंतुष्टी की गलियाँ
इच्छाओं
आकांशाओं की गलियाँ
मन इन गलियों में
भटक रहता है
उलझा रहताहै
बेचैन रहता है
गलियों से निकल कर
संतुष्टी की मुख्य
सड़क पर नहीं आ पाता
हालांकि मन जानता है
जब तक इन गलियों से
बाहर नहीं निकलेगा
चैन की सड़क पर नहीं
आ पायेगा
955-73-15-12-2012
जीवन,संतुष्टी,असंतुष्टी,मन,चैन,इच्छाएं,आकान्शाएं

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2013

पहले खुद ऐसा बनने का प्रयत्न करो



मिलना चाहता था
किसी इमानदार,शालीन
धैर्यवान,सहनशील, दयालु
निश्छल मन के
सर्वगुण संपन्न व्यक्ति से
बरसों ढूंढता रहा पर
कोई ना कोई अवगुण
हर इंसान में मिला
सोच में डूबा बगीचे में
बैठा हुआ था
ऐसा इंसान ढूंढता रहूँ या
खोज बंद कर दूं
मुझे घंटों सोच में डूबा देख
बगीचे के चौकीदार से
रहा ना गया
मुझसे परेशानी का
कारण पूछा
कारण बताने पर
चौकीदार ने उत्तर दिया
बाबूजी पढ़ा लिखा तो नहीं हूँ
पर इतना जानता हूँ
ऐसा इंसान ढूँढने की जगह
पहले खुद ऐसा बनने का
प्रयत्न करो
इसका आधा भी बन जाओगे
तो जीवन भर दुखी नहीं रहोगे
दूसरों को भी प्रेरित करोगे
954-72-15-12-2012
जीवन,सद्गुण,अवगुण,इंसान ,सर्वगुण संपन्न

वक़्त के साथ


वक़्त के साथ
ना पहाड़ों की
ऊंचाई कम होती
न समंदर की
गहराई कम होती
ना जीने की इच्छा
कम होती
ना किसी की उम्मीदें
कम होती
ना यादें कम होती
मगर इंसान की उम्र
कम होती
वक़्त के साथ 
ज़िन्दगी ख़त्म 
ज़रूर होती
953-71-15-12-2012
ज़िन्दगी,जीवन,वक़्त ,

गुरुवार, 7 फ़रवरी 2013

सुबह बड़ी शिद्दत से सजता संवारता हूँ


सुबह बड़ी शिद्दत से सजता संवारता हूँ
सुबह बड़ी शिद्दत से
सजता संवारता हूँ
शाम तक बासी फूल सा
मुरझा जाता हूँ
मगर उसका दीदार नहीं होता
बनने संवारने में ज़िन्दगी
गुजारता हूँ
पर उम्मीद का दामन नहीं
छोड़ता हूँ
आईने को रोज़ तसल्ली देता हूँ
सब्र रखने की ताकीद करता हूँ
एक दिन मेरे चेहरे के साथ
एक खूबसूरत चेहरा भी
दिखाऊंगा
जब तक तो मुझे ही बर्दाश्त
करना पडेगा
आइना खामोशी से
मुझे सजने संवारने देता है
वो भी मेरी मजबूरी
समझता है
952-70-15-12-2012
मजबूरी,शायरी,चाहत,हसरत,अरमान,मोहब्बत ,ख्वाहिश

मन रोता सत्य देखने को आज



मन रोता
सत्य देखने को आज
चारों ओर
झूठे बड़बोलों का राज
छा रहा हर मन में
घनघोर अन्धेरा आज
ह्रदय तड़पता
प्रेम की आस में आज
अहम् इर्ष्या का नंगा
नाच हो रहा
इंसान इंसान का
दुश्मन हो गया आज
संबंधों में पड़ गयी दरार
भाई भाई की ले रहा जान
दोस्त बन गया
सबसे बड़ा दुश्मन आज
स्वार्थी हो गया संसार
साज़ बाज़ रहे
बिना सुर के आज
कैसा आया
यह काल प्रभु आज
कैसा आया
यह काल प्रभु आज
951-69-15-12-2012
जीवन,मन,सत्य,सम्बन्ध,अहम्,स्वार्थ,इर्ष्या,द्वेष, अहम्

बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

हमने आज़ाद हो कर क्या देखा



हमने आज़ाद हो कर क्या देखा
=====================
हमने आज़ाद हो कर
क्या देखा
जो देखा खवाबों में भी
नहीं सोचा
रिश्तों को
तार तार होते देखा
बेटे को बाप को
गाली देते देखा
माँ बहन को सरे बाज़ार
ज़लील होते देखा
कमज़ोर को ताकतवर से
मार खाते देखा
गरीब को
अधिक गरीब होते देखा
किसानों को
आत्मह्त्या करते देखा
बेईमानों को
मालामाल होते देखा
राज़ करने वालों को
ऐशों आराम करते देखा
अब आम आदमी को
आम आदमी के लिए
राज करने के सिवाय
कुछ देखने की इच्छा
बाकी नहीं है

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
950-68-15-12-2012
स्वाधीनता,आजादी,आज़ाद,देश

दर्द के खामोश समंदर



दर्द के खामोश
समंदर को
बहुत शिद्दत से
सम्हाल कर
सीने में दबा रखा है
डरता हूँ
कहीं ज़ज्बात उफन कर
बाहर ना आ जाएँ
दर्द देने वालों चेहरों को
बेनकाब ना कर दे
दुनिया को
उनकी हकीकत से
रूबरू ना करा दे
मुंह दिखाने के
लायक ही ना छोड़े


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

949-67-15-12-2012
शायरी,मोहब्बत,ज़ज्बात ,दर्द ,

मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013

झूठी प्रशंसा के लिए




महीनों
दोस्त की कविताओं क़ी
प्रशंसा करता रहा
बदले में वो भी
मेरी कविताओं की
प्रशंसा करेगा
निरंतर आस लगाए रहा
मगर दोस्त ने
दोस्ती नहीं निभाई
एक बार भी
मेरी कविताओं की
प्रशंसा नहीं करी
निराशा में मैंने उसकी
कविताओं की प्रशंसा
करनी बंद कर दी
दोस्त से मिलने पर
उसे उल्हाना दिया
वो कहने लगा
मुझे तुम्हारी कवितायें
अच्छी नहीं लगती
प्रशंसा कैसे करता
तुम्हारी प्रशंसा भी झूठी थी
सच्ची होती तो कभी
प्रशंसा करना बंद नहीं करते
प्रशंसा पाने के लिए
प्रशंसा करना
दुनिया का चलन हो गया है
मैं भीड़ से अलग रहता हूँ
जैसा ठीक समझता हूँ
वैसा ही करता हूँ
झूठी प्रशंसा के लिए
आत्म सम्मान नहीं
बेच सकता हूँ 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 


948-66-15-12-2012
प्रशंसा,आत्म सम्मान,

सोमवार, 4 फ़रवरी 2013

उनको शिकायत है



मुंह से
निकली हर आह में
उनका नाम होता है
आँखों से
निकले हर अश्क में
उनकी जुदाई का दर्द
छुपा है
हर ख्वाब-ओ-ख्याल में
उनका अक्स बसा
रहता है
मगर फिर भी वो
हम से दूर रहते हैं
उनको शिकायत है
हम उन्हें
दिल से नहीं चाहते
947-65-15-12-2012
शायरी,मोहब्बत,ख्वाब-ओ-ख्याल

चाहता हूँ



चाहता हूँ
दो कदम चलूँ
मंजिल मिल जाए
मैं मुस्कराऊँ भर
लोग गले से लग जाएँ
मैं हकीकत से दूर रहूँ
जो भी चाहूँ वैसा हो जाए
ये ख्वाहिश तो हर
इन्सान की
पर खुदा की बतायी
राह पर तो चलो
कभी ये भी तो याद
आ जाए
946-64-15-12-2012

शायरी, ख्वाहिश, हकीकत, खुदा,इश्वर,

हमने उन्हें आइना दिखा दिया



उन्होंने हमें 
गालियों से नवाज़ा
हम तारीफ़ समझ कर
 चुप रहे
उन्होंने हम पर
 पत्थर मारे
हमने फूल समझ कर
 झेल लिए
उन्होंने बेवफा कहा
हमने उन्हें 
आइना दिखा दिया
वो मुंह छुपा कर
 चल दिए
945-63-15-12-2012
शायरी,बेवफा,उम्मीद

रविवार, 3 फ़रवरी 2013

मन कहता है



मन कहता है
कहीं कोई मेरा
अपना तो है
उम्मीद की नकाब से
ढका कोई चेहरा तो है
मिलेगा या नहीं
ये अलग बात है
आस में
ज़िंदा रखता तो है
944-62-15-12-2012
शायरी,उम्मीद

खुद्दारी दुश्मन बन गयी



लोगों के तीरों से
बचने की जितनी भी
कोशिश करी
उतने ही ज़ख्म खाता रहा
सीधी चाल चलने की
कोशिश करी
टेढ़ी चालों से
जवाब मिलता रहा
हँसने की कोशिश में
निरंतर रोना पडा
कभी रोशनी की किरण
नज़र भी आयी
उजाला देखने से पहले ही
अँधेरे से पाला पडा
खुद्दारी दुश्मन बन गयी
दवा की जगह हमेशा
ज़हर मिलता रहा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
943-61-15-12-2012
खुद्दारी,दुश्मन