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बुधवार, 4 दिसंबर 2013

ना होता म्रत्यु भय अगर


न होता म्रत्यु भय अगर
परमात्मा से 
डरता कौन 
न होता धन अगर
बेईमान बनता कौन
न होता सुन्दर चेहरा अगर
आसक्त होता कौन
न होता दर्द अगर

जीवन में रोता कौन
न होती कलम अगर
मनोभाव 
लिखता कौन 


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
04-372-04-12-2013
परमात्मा,म्रत्यु,जीवन,


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

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