ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

मन की प्रसन्नता


मन
प्रसन्न न हो
बलवान
निर्बल हो जाता
मन प्रसन्न हो
निर्बल को
बल मिल जाता
कितना भी पढ़ो लिखो
 मन प्रसन्न रखना
अवश्य सीखो

23-393-17-12-2013

मन,जीवन,प्रसन्नता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें