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शनिवार, 7 दिसंबर 2013

वक़्त के साथ समझदार हो गए हैं हम


वक़्त के साथ
समझदार हो गए हैं हम
ग़मों को सीने में
दबा कर हँसते हैं हम
ज़ेब में खंज़र छुपाये
गले मिलते हैं हम
खुदगर्ज़ी में दोस्त को
दुश्मन बनाते हैं हम
मोहब्बत के नाम पर
मन में हवस रखते हैं हम
हर इंसान को
शक़ से देखते हैं हम
वक़्त के साथ
कितना बदल गए हैं हम
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
 08-378-07-12-2013
वक़्त,समय,जीवन,ज़िंदगी,इंसान,फितरत,बदलाव

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