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मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

अपराधी

बोलना चाहता था 
उसे बोलने नहीं दिया 
करना चाहता था
उसे करने नहीं दिया
उसे वही करने को 
बाध्य किया गया 
जो तुम चाहते थे
उसका 
अधिकार छीना गया 
उस पर 
अत्याचार होता रहा 
वह चुप रहा
उससे सहा नहीं गया  
वह बागी हो गया 
तुमने उसे 
अपराधी बना दिया 
अब उसे 
सजा देना चाहते हो 
उसका जीवन भी 
छीनना चाहते हो 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
12-382-10-12-2013
अपराधी,अधिकार,बागी,जीवन,अत्याचार,नक्सलवादी 

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