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सोमवार, 2 दिसंबर 2013

दुनिया लाख कहे अवगुण


दुनिया
लाख कहे अवगुण
जिस की रग रग में
बसा छल कपट
वो कहता उसे गुण
जिसने सहा बार बार
उसे लगता
हर मनुष्य दुश्मन
तोलता परखता
फिर भी नहीं
कर पाता विश्वास
ना खाये चोट दोबारा
डरा घबराया
संशय में जीता रहता

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
01-371-02-12-2013

गुण,अवगुण,छल कपट,संशय,विश्वास ,जीवन

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