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मंगलवार, 26 नवंबर 2013

अब और क्या क्या बंटेगा ?


धरती बंटी
मज़हब बंटे
भाषा बंटी 
जात बंटी 
घर बंटे
परिवार बंटे
रिश्ते बंटे
दिल बंटे
कब हम से
"मैं "
हुआ
पता ही नहीं चला
सोच में डूबा 
हूँ 
अब और
क्या क्या बंटेगा ?

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
33-370-26-11-2013

बँटवारा ,मज़हब ,भाषा,रिश्ते,जात पांत
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

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