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गुरुवार, 21 नवंबर 2013

ना मान चाहूँ ना सम्मान चाहूँ


न मान चाहूँ
न सम्मान चाहूँ
जीवन में 
केवल चैन चाहूँ 
लोगों के सुख में सुख पाऊँ
दुःख में उनका साथ निभाऊं
न क्रोध आये
न मन में बैर लाऊं
हँसता मुस्काराता
लोगों के काम आऊं
कर्म पथ पर 
चलते चलते 
संसार से विदा हो जाऊं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
25-362-21-11-2013

धैर्य,चैन,मान,सम्मान,जीवन मन्त्र ,कर्म,क्रोध

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