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रविवार, 27 अक्तूबर 2013

उसे अपशब्द कहते समय


उसे अपशब्द
कहते समय
ध्यान नहीं आया
उत्तर में वो भी
अपशब्द कह सकता है
पर जब उसने
अपशब्द कहे
मेरा खून खौलने लगा
प्रत्युत्तर में
उसे पहले से भी अधिक
अपशब्द कहने ही वाला था
तभी मन में विचार आया
इस तरह तो सिलसिला
कभी समाप्त नहीं होगा
बात अपशब्दों तक
सीमित नहीं रहेगी
सदा के लिए दुश्मनी में
बदल जायेगी

क्रोध पर नियंत्रण किया
ह्रदय को कडा कर
मुस्काराकर 
केवल इतना कहा
मित्र मुझे क्षमा करना
त्रुटी मेरी ही थी
वो भी मुस्काराकर बोला
मित्र अब भूल भी जाओ
पहले ही कह देते तो
बात नहीं बढ़ती

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
25-332-27-10-2013

अपशब्द,व्यवहार,जीवन,जीवन मन्त्र,

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