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रविवार, 6 अक्तूबर 2013

व्यथित ना हो


व्यथित ना हो
अगर संस्कार परम्पराएं
प्यार स्नेह सम्बन्ध
कम दिखते हैं
पर पूर्णतया
समाप्त नहीं हुए हैं
आशा और विश्वास 
मन में रख कर
सोचना चाहिए
मनुष्य पाषाण 

युग में पहुंचे
उससे पहले सचेत
होना चाहिए
मिल जुल कर
इन्हें सुप्तावस्था से
निकालना चाहिए

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
06--313-06-10-2013

जीवन, जीवन मन्त्र,संस्कार ,परम्पराए,प्यार स्नेह,सम्बन्ध 

1 टिप्पणी:

  1. आपकी लिखी रचना की ये चन्द पंक्तियाँ.........

    व्यथित ना हो
    अगर संस्कार परम्पराएं
    प्यार स्नेह सम्बन्ध
    कम दिखते हैं
    पर पूर्णतया
    समाप्त नहीं हुए हैं

    बुधवार 09/10/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    को आलोकित करेगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं