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शनिवार, 5 अक्तूबर 2013

यह कैसा ध्यान है


यह कैसा ध्यान है
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दिन रात सुनता हूँ
जीवन में शांति चाहिए तो
मन को शांत करो
मन को शांत करने के लिए
ध्यान करो
ध्यान के लिए
बंद कमरे के एकांत में
जहां कोई ध्वनी
कानों में नहीं पड़े
आँखें बंद कर के
एकाग्रचित्त हो जाओ
मस्तिष्क में विचारों को
प्रवेश मत करने दो
समझ नहीं आता
यह कैसा ध्यान है
कोलाहल से भरे जीवन की
स्थितियों के विपरीत है
ध्यान करना ही है तो
संतुष्टि को लक्ष्य बनाओ
इच्छाओं को त्यागो
आवश्यकताएं कम करो
पकवानों से सजी
भॊजन की मेज़ पर
केवल दाल रोटी खाओ
होड़ के संसार में
होड़ से बचो
दिल्ली जाना है तो
मुंह तो दिल्ली की ओर करो
सोचना तो प्रारम्भ करो  
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
04--312-05-10-2013
जीवन,जीवन मन्त्र ,ध्यान ,संतुष्टि,इच्छाएं, लक्ष्य , त्यागो

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