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गुरुवार, 24 अक्तूबर 2013

आज मित्रता से कलंक धो दिया


मन कुंठा से भरा हुआ था
विवशता में जी रहा था
सत्य पर पर्दा पडा हुआ था
आज मित्रता से कलंक
धो दिया
मित्र को प्रमाण दे दिया
दुश्मन को दुश्मन कह दिया
खोखले संबंधों को तोड़ दिया
मन को कुंठा मुक्त कर दिया
ह्रदय को दुःख अवश्य हुआ
पर महापाप से बच गया
आज नहीं करता तो
कल टूट कर बिखर जाता
मन सदा रोता रहता
मित्र शब्द से ही
घ्रणा करने लगता

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
19--326-24-10-2013


मित्र,मित्रता,जीवन,जीवन मन्त्र, कुंठा

1 टिप्पणी:

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