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सोमवार, 9 सितंबर 2013

अहम् के उन्माद में


देवताओं ने भी
नहीं सोचा होगा
अहम् के उन्माद में
मनुष्य धरती पर
तांडव मचाएगा
प्रक्रति के हर रंग को
बदरंग कर देगा
इर्ष्या द्वेष में
मनुष्य मनुष्य का
दुश्मन हो जाएगा
अपनों को भी पराया
समझेगा
होड़ में मनुष्य से
दानव बन जाएगा
पता होता अगर
देवताओं को
मनुष्य के मंतव्य का
मनुष्य के स्थान पर
धरती को केवल
प्रक्रति के रंगों से भर देते
स्वर्ग से निहार कर
मन को प्रसन्न करते
ह्रदय को कभी
व्यथित ना होने देते

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
21-265-09-09-2013

अहम् ,मनुष्य,होड़ ,इर्ष्य,द्वेष,देवता,तांडव,जीवन,

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 11/09/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in ....पर लिंक की जाएगी. आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं