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रविवार, 22 सितंबर 2013

छोटे कदमों से


जब
छोटे कदमों से
सहज भाव से
लक्ष्य तक
पहुँच सकता हूँ
बड़े क़दमों से
तेज़ गति से
क्यों चलूँ
असंतुलन
को निमंत्रण दूं
थक कर
ह्रदयगति बढाऊँ
खुद को
असहज करूँ

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
47-291-22-09-2013
सहजता,जीवन,जीवन मन्त्र,लक्ष्य ,धैर्य

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