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शनिवार, 7 सितंबर 2013

समझना-समझाना


समझना-समझाना
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समझने
समझाने पर चर्चा 
में 
गुरु शिष्य को समझाने लगे
जो इशारों में नहीं समझे
उसे कम से कम शब्दों में
समझाना चाहिए
जो इससे भी नहीं समझे
उसे उदहारण सहित
विस्तार से समझाना चाहिए
शिष्य बीच में बोल उठा
गुरूजी 
ऐसे भी नहीं समझे तो
क्या मार पीट कर 
समझाना चाहिए ?
गुरु ने उत्तर दिया
जो प्यार से नहीं समझता
वो मारने पीटने से भी
नहीं समझेगा
जिद्दी और ढीठ बन जाएगा
उसे समय ही सिखाएगा
तुम्हें भी इशारों में
एक बात समझा रहा हूँ
मनुष्य को 
धैर्य रखना चाहिए
बिना पूरी बात सुने
कभी किसी की बात नहीं
काटनी चाहिए

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
18-262-07-09-2013
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

समझना,समझाना,जीवन,जीवन मन्त्र,.नासमझ

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