ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शुक्रवार, 6 सितंबर 2013

मेरी बात से चौंकना भी मत


मेरी बात से
चौंकना भी मत
मुझ पर
अविश्वास भी मत करना
तुमसे प्रेम तो करता हूँ
पर केवल तुमसे ही नहीं
आधा तुम से
आधा स्वयं से प्रेम करता हूँ
तुम अवश्य प्रश्न करोगी
यह कैसा प्रेम है
मैं बताऊँ
उससे पहले तुम बता दो
क्या तुम अपने आप से
 प्रेम नहीं करती
पर में दुखी नहीं होता हूँ
जानता हूँ
अगर तुम अपने आप से
प्रेम नहीं करोगी तो फिर
मुझसे भी
प्रेम नहीं कर सकती
किसी से प्रेम करने से पहले
स्वयं से प्रेम करना
आवश्यक होता है
स्वयं से
प्रेम नहीं करने वाला
मनुष्य संवेदनहीन
मृत सामान होता है
मृत मनुष्य निर्जीव होता है
निर्जीव मनुष्य
किसी से
प्रेम कर ही नहीं सकता

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर15-259-06-09-2013
जीवन,प्रेम,अविश्वास ,सम्बन्ध ,जीवन,जीवन मन्त्र

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें