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गुरुवार, 5 सितंबर 2013

प्रशंसा करनी है तो मेरे मुंह पर नहीं


प्रशंसा करनी है
तो मेरे मुंह पर नहीं
पीठ पीछे करो
जितना लायक  हूँ
बस उतनी ही करो
मुंह पर प्रशंसा से
मुझे भ्रम रहता है
प्रशंसा के
लायक हूँ भी या नहीं
मन में सोच रहता है
डर भी लगता है
अनुचित प्रशंसा कहीं
सर पर ना चढ़ जाए
मुझे पथ से ना भटका दे
11-255-05-09-2013
जीवन,जीवन मन्त्र,प्रशंसा,भ्रम,

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

1 टिप्पणी:

  1. आपने लिखा....हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए शनिवार 07/089/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं