ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

गुरुवार, 26 सितंबर 2013

अपनी प्रशंसा को सत्य मानूं


अपनी प्रशंसा को
सत्य मानूं
उसे सर पर चढ़ाऊँ
या शिष्टाचार समझूं
यह तो
तय नहीं कर पाया
अब तक
पर इतना अवश्य
तय कर लिया
प्रशंसा के पीछे का
कारण ढूंढें बिना
पहले से अच्छा
करने का प्रयत्न
करता रहूँ
अपने चाहनेवालों को
निराश नहीं करूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
53-297-26-09-2013
प्रशंसा,जीवन,जीवन मन्त्र

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना की
    अपनी प्रशंसा को
    सत्य मानूं
    उसे सर पर चढ़ाऊँ
    या शिष्टाचार समझूं
    ये पंक्तियाँ लिंक सहित
    शनिवार 28/09/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    को आलोकित करेगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं