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रविवार, 1 सितंबर 2013

न पंडित हूँ न पादरी हूँ

न पंडित हूँ न पादरी हूँ
न मुल्ला हूँ न ग्रंथि हूँ
मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे
चर्च में माथा टेकता हूँ
प्रेम का अमृत चखता हूँ
सब की इज्ज़त करता हूँ
रीति रिवाज़ मानता नहीं
व्रत उपवास करता नहीं
इंसान को इंसान समझता हूँ
इंसानियत को धर्म मान कर
जीवन पथ पर चलता हूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
110-244-31-08-2013
धर्म,पंडित,इंसान,इंसानियत,मंदिर,मस्जिद 

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
    ---
    हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {साप्ताहिक चर्चामंच} पर आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल में दूसरी चर्चा {रविवार} (01-09-2013) को हम-भी-जिद-के-पक्के-है -- हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल चर्चा : अंक-002 को है। कृपया पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा |
    ---
    सादर ....ललित चाहार

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