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मंगलवार, 13 अगस्त 2013

ज़िन्दगी अब तक तुम प्रश्न करती रही


ज़िन्दगी अब तक 
तुम प्रश्न करती रही 
मुझसे
अब कुछ प्रश्न
मैं भी कर लूं तुमसे
जब उम्र भर 
चैन नहीं मिलता
फिर चैन का 
भ्रम क्यों देती हो
जब सपने 
कभी पूरे नहीं होते
सपने क्यों दिखाती हो
जब इच्छाएं आकान्शाएं
पूरी नहीं होती
क्यों मन में 
इच्छा जगाती हो
जिंदगी हँस कर बोली
अधिक पाने की इच्छा में
तुम होड़ में जीते हो
असंतुष्ट रहते हो
फिर चैन कैसे मिलेगा
अगर सपने नहीं 
देखोगे तो
कर्म को भूल जाओगे
अगर इच्छाएं
आकान्शाएं नहीं 
रखोगे तो ज़िन्दगी 
नीरस हो जायेगी
जीवित होते भी
मृत समान जीते रहोगे
ज़िन्दगी 
उतनी कठिन नहीं है
जितना तुम सोचते हो
आवश्यकताएं कम कर लो
संतुष्ट रहना सीख लो
ज़िन्दगी 
आसान हो जायेगी
दुरूह नहीं
अच्छी लगने लगेगी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
49-186-13-08-2013
जीवन जिंदगी,चैन,संतुष्टि,इच्छाएं,आकान्शाएं,आशा,

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